कांकड आरती – ३

उठा उठा हो साधक | साधा आपुलालें हित |

गेला गेला हा नर्दह | मग कैचा भगवंत || १ ||

 

उठा उठा हो वेगेंसी | चला जाऊ राऊळासी |

हरितल पातकांच्या राशी | कांकडारती पाहोनी || धृ o ||

 

उठोनिया हो पाहंटे | पाहा विठ्ठल उभा विटे |

चरण तयाचे गोमटे | अमृतद्रष्टी अवलोका || २ ||

 

जगें करा  रुक्मिणीवरी | देव आहे नीजसुरा |

वेगें निंबलोण करा | द्रष्ट होईल तयासी || ३ ||

 

पुढे वांजत्री वाजती | ढोल दमामे गर्जती |

होत कांकडआरती | माझ्या पंढरीरायाची || ४ ||

 

सिंहनाद शंखभेरी | गजर होतो महाद्वारी |

केशवराज विटेवरी | नामा चरण वंदीतो || ५ ||